Thursday, May 16, 2024

Graphisads ऋषिकेश Trip

Graphisads ऋषिकेश trip

25 अप्रैल को करीब दो महीने बाद graphisads Ltd के CMD मुकेश गुप्ता जी से मिला थोड़ी देर,  फिर अपने साथी इरशाद अनस और आमिर भाई से मिला। तब पता चला 26/27/28 अप्रैल तीन दिन का ऋषिकेश का कार्यक्रम है बड़े संस्थान अपने स्टाफ को motivation और नई ऊर्जा के लिए इस तरह के कार्यक्रम रखते है।

Graphisads एक चिरपरिचित नाम है विज्ञापन की दुनियां में खासकर दिल्ली एनसीआर में। हम अखबारों होर्डिंग रेडियो टीवी में जो विज्ञापन पढ़ते देखते है उनमें Graphisads की भी अच्छी खासी हिस्सेदारी होती है। विज्ञापन के अलावा विभिन्न सरकारी इवेंट्स में भी इस कम्पनी ने अपनी पैठ बनाई है ।

इस कम्पनी के चेयरमैन और MD है Mukesh Gupta ji और कम्पनी का आधुनिक संचालन है उनके सुपुत्र आलोक गुप्ता के सुरक्षित हाथों में। ये तो हो गई संक्षिप्त जानकारी अब आगे। 

सभी छोटी बड़ी कम्पनी अपने staff साथियों को मनोरंजन और motivation के लिए कुछ ना कुछ नया करते रहते है इसी कड़ी में graphisads ने अपने staff के लिए ऋषिकेश का तीन दिवसीय trip का तोहफा दिया।

मेरा जाना अचानक ही हुआ क्योंकि मैं दो महीने से करीब ऑफिस नही जा पाया था मैं graphisads में director हूं पिछले साल ही मुम्बई से आने के बाद मुकेश जी ने मुझे ये जिम्मेदारी दी। 

मुकेश जी से पूछने के बाद मैंने सुबह जाने का plan बनाया, चूंकि trip सिर्फ staff के लिए थी लिहाज़ा घर का कोई सदस्य जा नहीं सकता था हमारे यहां लोकसभा की वोटिंग भी थी लेकिन वोटर आई डी में नाम न होने से इस महाकुम्भ में शामिल नहीं हो पाया।

मैं करीब 11 बजे सुबह अपनी कार से निकला अकेले। Trip में ऋषिकेश तक मेहदी हसन और गुलाम अली की कई गजल सुनी एक सीडी में मेहदी हसन ने अपने विषय में हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बारे में यहां वहां के संगीत के विषय में बहुत विस्तार से चर्चा की है जिनके बारे में लोगो को पता नहीं है। उस चर्चा को सबके लिए किसी वीडियो में पेश करूंगा ।

करीब चार बजे हरिद्वार पुल से left turn लिया जो सीधे साढ़े चार बजे तक  नीरज रिवर रिजॉर्ट पर पहुंचा । नीरज रिजॉर्ट बेहद खुबसूरत है जंगल में मंगल जैसे उदाहरण के लिए सटीक ।

जब मैं पहुंचा तो होटल स्टाफ ने तिलक लगाकर तुलसी की 108 मनकों की माला देकर स्वागत किया । पूर्णतया सनातन का एहसास, 4.30 बजे भी लंच लगा हुआ था। पांच बजे सब लंच वाले हॉल में एकत्र हुए और सिलसिला शुरू हुआ ग्राफिसैड्स से जुड़े किस्से कहानियों का । 

मेरे लिए आलोक गुप्ता को सुनना सुखद आश्चर्य था क्योंकि जब हम मुम्बई shift हुए थे तब तक आलोक ने बचपन से युवा दहलीज पर कदम रखा ही था । आलोक को पहली बार सुन रहा था सधा सरल अंदाज बोलने की परपक्वता और खुद स्वीकार करना कि काम को लेकर वो हमेशा कड़क और गम्भीर है। 

सभी स्टाफ को मैं मिलता देखता रहा हूं पुराने लोगो में अनिल रस्तोगी जी, बीएम झा जी और पुनः जुड़े विवेक सिन्हा जी को बहुत पहले से जानता हूं अन्य सभी करीब करीब मेरे लिए नए ही है ।

ऑफिस जाता रहा हूं एक बात हमेशा मन को खटकती रही कि graphisads के लोग दुआ सलाम अभिवादन में बहुत यकीन नही रखते लेकिन ऋषिकेश आने और मिलने के बाद ये भ्रम टूटा। सभी स्टॉफ की आपसी बॉन्डिंग अच्छी है ।

सबसे अच्छी और बेहतरीन बात लगी मुकेश जी के प्रति सभी सहकर्मियों का समर्पण भाव वरना आज के दौर में किसी कम्पनी में परिवार जैसा माहौल मिलना बेहद कठिन है । मुकेश जी को मैं बहुत पहले से जानता हूं उनका सरल होना किसी को भी आकर्षित कर सकता है । जैसा कि उनके मित्र बिनय प्रकाश जी ने उस दिन कहा मुझे मुकेश की सब से बेहतरीन खूबी लगती है वो नाराज भी हो तो मुस्कराते हुए अपनी नाराजगी जताते है। 

आर एन शर्मा जी का जिक्र करना जरूरी है 80 वर्ष से ऊपर के शर्मा जी पहले फौज में बड़ी पोस्ट में थे । वो graphisads के संकटमोचक है । उनके विषय में जो किस्से सुनने को मिले उससे यही साबित होता है जो काम किसी से न हो वो शर्मा जी ही कर सकते है। इस उम्र में उनकी गर्मजोशी देखते ही बनती है । कम्पनी के लिए अकाउंट हेड अनिल रस्तोगी भी सफ़लता की धुरी है ।

करीब 65 लोग थे इस trip में और सभी मुकेश जी के प्रति दिल से आदरभाव रखते है। मुकेश जी भी सभी स्टॉफ को परिवार का हिस्सा मानते है । 

उस शाम कई किस्से कहानियां सुनाए गए सबसे अधिक किस्से बीएम झा के पास थे क्योंकि सभी इवेंट्स को संभालने की जिम्मेदारी उन्ही के पास रहती है तो स्वाभाविक है कई अतरंगी किस्से उन्ही के पास होंगे उनका जिक्र यहां करूं तो कई पेज भर जायेंगे।

उस सभा के बाद रात्रि भोज और सुरा का इंतजाम भी था । कुछ साथियों की क्षमता अद्भुत थी । इस कार्यक्रम से ही पता चला कि इस परिवार मे अपने काम में परिपक्व होने के अतिरिक्त भी अद्भुत प्रतिभा छुपी हुई है । मुझे जो पहला नाम याद आ रहा है वो है निर्मल का वो बहुत सुरीले गायक है उनको सुनकर कहा जा सकता है वो व्यवसायिक गायक भी हो सकते थे हो सकते है ।


सीमा जी ने बिना संगीत के अच्छी प्रस्तुति दी। आलोक जी में गायक के गुण पापा से ही मिले है उन्होंने अच्छा गाना गाया। मुकेश जी ने तो कई अवसरों पर अपनी गायन प्रतिभा का लोहा मनवाया है उनके गाए 60/70 दशक के गाने सबको साथ गाने के लिए मजबूर करते है।

सबको आश्चर्य में डाला हाल ही में ब्याही परख का नृत्य देख कर उनकी नृत्य निपुणता ने सबसे अधिक तालियां बटोरी। उनके अतिरिक्त  शिवानी ने भी अपने शानदार स्टेप्स से सबका मन खूब मोहा। आमिर और इरशाद की शेरो शायरी और अनस द्वारा लोगो की नकल और ख़बर पाठन ने सबका दिल जीता ।

अनस की बात चल रही है तो मैं वापसी का किस्सा बताता चलता हूं। Rishikesh से हम एक ही गाड़ी में थे एक मित्र ने उनके आने से पहले मुझे पूछा था हरीश जी आप आमिर इरशाद और अनस से कैसे एकाकार हो कैसे साध लेते है इन्हे। मेरा जवाब था बहुत आसान हैं मैं उनके जैसा ही हो जाता हूं। 

जब अनस गाड़ी में आ गया तो बातों बातों में अनस ने तीन चार संस्कृत के श्लोक सुनाए मतलब बताया। उसने कहा मैं तो संघ के स्कूल में पढ़ा हूं श्लोक वंदे मातरम जन गण मन तो हमें रोज बताया गवाया जाता था । 

छोटी उम्र में ही अनस समझ गया सबसे जरूरी है पढ़ाई। मैं ये नही कह रहा पढ़ाई से सब सही हो जायेगा लेकिन जाहिल कम तो होंगे। 

खैर पहले दिन के man off the match तो निर्मल ही थे। 

उस दिन दोपहर में मेरे कमरे में आमिर इरशाद और अनस ने फूलों का गुलदस्ता देकर मेरे प्रति सम्मान जताया। मेरे साथ कमरे में कपिल अरोड़ा थे। ऑफिस में एक दो बार दुआ सलाम हुई थी बस। लेकिन एक दूसरे को समझने के लिए ईश्वर ने देवभूमि को चुना। 

मेरी कपिल जी की काफी देर बात हुई पहली रात। मुझे पता चला उनकी एक अद्भुत बेटी है जो सिर्फ नृत्य संगीत ही जीती है । मैंने उन्हें उनके विषय में बताया वो पिछले जन्म में योगी थे और मैं उन्हें योगी ही बुलाऊंगा।

नीरज रिवर रिजॉर्ट का खाना भी स्वादिष्ट था और जगह की जितनी तारीफ की जाएं कम है रिजॉर्ट में सबसे अधिक ध्यान हरियाली पर दिया है मुझे एक मोर ने बहुत आकर्षित किया मोर की painting है और पंखों को ऐसे सजाया गया कि सब पर पौधे रखे है लॉबी में भगवान बुद्ध की खुबसूरत तस्वीर लगी है। दो बड़े घास के मैदान है जहां 100 लोग आराम से आ सकते है


रिजॉर्ट के सामने से ही नजर जा रही है चिल्ला नहर लेकिन उसमे बहाव इतना तेज है कि उसमे नहाना खतरे से खाली नहीं और इजाजत भी नही । गर्मी का आनन्द लेने के लिए स्विमिंग पूल भी है ।

पहली रात्रि जब हम रात्रि भोज में गा बजा खा रहे थे तभी किसी ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें रिजॉर्ट के बाहर ही एक तेंदुए को देखा गया जिसकी clip CCTV में कैद हो गई थी किसी मित्र ने कहा अरे ये तो पुरानी फुटेज है तो मेरा जवाब था शेर date पढ़कर नही आता पहले आ गया तो दोबारा नहीं आयेगा ऐसा तो है नही, फिलहाल हमे शेर का कोई डर नहीं था। 

अगले दिन सुबह दो जगह जाने की choice थी रिवर राफ्टिंग या नीलकंठ महादेव मन्दिर। मैंने रिवर राफ्टिंग चुना क्योंकि यह पहला मौका था पानी को चीरकर आगे बढ़ने का । महादेव महाकाल नीलकंठ तो मेरे साथ ही होते है सदा। हम 12 लोग रिवर राफ्टिंग वाले थे बाकि सभी नीलकंठ महादेव गए।

लेकिन रिवर राफ्टिंग site तक पहुंचना आसान नहीं था उस दिन कोई सरकारी अवकाश शायद मजदूर दिवस के कारण छुट्टी थी जिस जगह हमे रिवर राफ्टिंग का इंतजाम करने वाले लोगो से मिलना था वहां तक पहुंचने में हमे 3 घण्टे लग गए जबकि वापसी में हम आधे घण्टे में ही अपने होटल पहुंच गए थे। 

पहले हम राम झूले में भटकते रहे फिर वापस पैदल कभी अपनी मिनी बस से जैसे तैसे पहुंचे इस एजेन्सी के पास जिसने हमें गंगा में ले जाना था। वहां से हम 8 लोग एक गाड़ी में सवार होकर करीब एक घण्टे की दूरी का सफर तय कर गंगा किनारे पहुंचे हमारे साथ एक गाइड रक्षक कैमरा मैन वन मैन आर्मी था भंडारी हमारी नाव गंगा में पहुंच चुकी थी ।

भंडारी ने हमे समझाया कैसे चप्पू चलाने है कैसे उसके आदेशो पर ध्यान देना है ।भंडारी ने हमें बताया कि उसके सारे दिन में करीब 3 अधिकाधिक 4 चक्कर लग जाते है । रिवर राफ्टिंग का सफर करीब 9 किलोमीटर का था हमारे चार साथी दूसरी किसी नाव में थे । 


सुरक्षा के लिए हमे जैकेट और हेलमेट पहना दिए गए थे । नाव में चढ़ने से पहले भंडारी ने अपने हेलमेट में लगे GoPro कैमरे की तरफ इशारा कर बताया कि यदि आपको वीडियो फोटो चाहिए तो 3000 रूपए लगेंगे हमने सोचा यादगार के तौर पर हमें इस धरोहर को अपने पास रखना चाहिए हम वीडियो के लिए तैयार हो गए क्योंकि सुरक्षा की दृष्टि से हमारे मोबाइल एक बैग में रख लिए गए थे । 

मेरे अलावा जो अन्य लोग थे  इरशाद आमिर राजेश  बलाखे, अंकित गोयल,अनिल रुस्तागी, नवीन मगु, रूपेश सिंह, सौरभ शर्मा, नाजिम खान और जितेन्द्र विवेक सिन्हा सभी बहुत जोश में थे ।

सफर शुरू हुआ हमे चप्पू कैसे चलाने है समझने में 2 मिनट लगे जोश भरने के लिए हमारे इर्दगिर्द से जो राफ्टिंग नाव जा रही थी कुछ ना कुछ नारे लगा रही थी हमारी नाव में सवार लोगो का नारा था बोलो गंगा मैया की जय कुछ लोग जय श्री राम के नारे भी लगा रहे थे । 

अभी हम थोड़ी दूर ही गए होंगे कि भंडारी ने कहा सब कुछ कहेंगे वीडियो बन रहा था लगभग सबने यही कहा हम जोश में है होश में है बहुत आनंद आने वाला है इस अनुभव को हम हमेशा याद रखने वाले है नारे लगाते हम करीब दो किलोमीटर गए होंगे कि भंडारी ने एक जगह नाव को रुकवा दिया और सबसे कहा सब नदी में कूद जाएं शुरुआती हिचक के बाद सब नदी में कूद गए डूबने का scope था नही क्योंकि सुरक्षा जैकेट पहनी थी 

हम नाव के किनारे पानी में अठखेलियां कर रहे थे करीब 15 मिनट एकदम ठंडे पानी में आनंद लेते रहे । उसके बाद आगे का सफर शुरू हुआ ।मैं एक ही बार पानी में उतरा जबकि बाकी साथी 3 बार । करीब डेढ़ घण्टे राफ्टिंग के बाद हम अपने गंतव्य पर पहुंचे। यदि हम राफ्टिंग नही करते तो अफसोस होता हमने इस adventure का मजा क्यों नही लिया। 

जब हम पहुंचे करीब तीन बज चुके थे सब के पेट में चूहे कुलाचे मार रहे थे हमने पूछ कर प्रसिद्ध टोपी वाले भोजनालय में लंच किया । तब तक हमारे अन्य चार साथी भी आ गए थे । तभी विवेक जी ने बताया मुकेश जी जा चुके है दिल्ली।

हमारी गाड़ी करीब 2 किलोमीटर दूर खड़ी थी । गाड़ी में पहुंच कर सबने पानी पीकर सफर शुरू किया । आधे घण्टे में हम अपने रिजॉर्ट में थे । लंच तब भी लगा था । कुछ किया कुछ जरुरत नही लगी ।

5 बजे करीब हमे रिजॉर्ट के बड़े लॉन में एकत्र होना था कुछ मनोरंजक खेलो के लिए दो लोगो की टीम आई थी करीब ⅚ गेम थे मुझे सबसे अच्छा लगा एक टेबिल पर जो लोग बैठे है उन्हे अपनी या अपने किसी साथी की वो बातें बतानी है जो सबको नहीं पता और उसके बाद अपनी टेबिल change करनी है ।

इरशाद ने मेरे विषय में बोला मैंने अपने विषय में बोला पहली बार सबको बताया मैं हस्तरेखा वास्तुशास्त्र ज्योतिष का ज्ञाता हूं। बाकी अन्य game भी हुए लेकिन मेरी उनमें कुछ खास रुचि नहीं थी । रात्रि कमरे में पहुंचा तब तक 11 बज चुके थे । अगली सुबह 5 बजे  करीब प्रकृति दोहन का कार्यक्रम था उसके बाद घर वापसी थी । 

जब मैं तैयार होकर breakfast को पहुंचा उस समय ही आलोक जी ने अपना motivational lecture खत्म ही किया था उसके बाद एक ग्रुप फोटो खींचा गया । 

मैं नाश्ते के लिए आया तो कुछ साथी अपना हाथ दिखाने आ गए कई लोग हाथ दिखाना चाहते थे लेकिन सबको बस से जाना था बस इन्तजार कर रही थी लिहाजा वही लोग रह गए जो अपनी कार से जाने वाले थे राजेश जी और धर्मवीर जी मेरे साथ हो गए। आमिर भाई की गाड़ी में इरशाद अनस और …. सवार हो लिए। 

इस वादे के साथ रास्ते में रुकते रुकाते चलेंगे। एक जगह हम रुके गन्ने के जूस के लिए और एक जगह कॉफी के लिए । वहां से धर्मवीर आमिर की गाड़ी में और अनस हमारी गाड़ी में आ गए। 

जब दोनो को उतार कर घर पहुंचा तो आठ बज रहे थे । 

Trip के लिए मुकेश Sir को धन्यवाद किया trip वास्तव मे शानदार थी और इससे सभी में नई ऊर्जा आयेगी। अक्षय पांडेय जिन्होने सभी कार्यक्रमों को सुचारुरूप से आख़िरी अंजाम तक पहुंचाया उनको साधुवाद, आलोक गुप्ता जी के मार्गदर्शन में यह सफर हमेशा यादगार रहेगा।

Sir thank you very much it's a wonderful trip and much needed for all, I am sure this trip idea was Alok ji, I am very much impressed with Alok ji s approach and communication skills, you are a unique personality and Father figure for me and all, I am surprised and very much impressed with all the staff no one even say a word against you or Graphisads, all are very loyal towards company and for both of you, for me this trip is to understand other staff closely and come to know many of them well and there skills and nature, I am writing a detailed trip experience and share, thanks again and proud to be part of it, regards,

इसी उम्मीद के साथ कि हम शीघ्र फिर एकत्र होंगे कुछ नई ऊर्जा कुछ नए task के साथ । और हां बहुत से लोगो का हाथ जन्मपत्री देखना बाकी है सबको शीघ्र मौका मिलेगा।

हरीश शर्मा 










Law of attraction The real truth

Law of attraction The real truth 

बेटी पत्नी काफी समय से के रहे थे दूसरो के motivational videos देखते रहेगें अपने विडियो बनाकर लोगो को प्रेरित कर सकते हो तो करते क्यों नही। 

हिम्मत ही नहीं पड़ रही थी लेकिन सोचा जब लिखे की तारीफ मिल जाती है तो बोलने की भी कुछ तो मिल ही जायेगी।

अब लगा शुरुआत कभी तो करनी है तो आज से अच्छा दिन क्या हो सकता है 14 मई 1995 हमारी शादी की सालगिरह। न न शादी के 29 साल की बात नही कर रहा हूं ।

यह वीडियो पूर्णतया motivational है और topic है law of attraction चाहत का कानून, मैं इस विषय को कुछ अन्य नाम भी देता हूं art of attraction, love of attraction, ब्रह्माण्ड का आकर्षण, attraction of universe.

इस विषय पर लाखों नही तो हजारों वीडियो यूटयूब पर मिल जायेंगे । कम से कम 50 ऐसे expert मिल जायेंगे जिनको देख सुन पढ़कर मैंने जाना कि law of attraction क्या है । अब आसान तरीका तो ये था मैं सबको सुनकर उनकी best बातों को मिलाकर आसानी से एक वीडियो बना लेता ।

लेकिन मुझे वास्तविक वीडियो बनाना है अपने अनुभवो के वीडियो से शुरुआत करते है । जो लोग सुन रहे है देख रहे है उन्हे भी लगेगा अरे ये तो मेरा ही अनुभव है मेरे साथ भी तो ऐसा ही हुआ था हुआ है। 

तो सुनिए पढ़िए मेरे अनुभव आपके अनुभव बरेली में जन्मा पला बढ़ा । उस समय तो न पता था, उस समय क्या, यूटयूब आने के  8/10 बाद भी यह motivational ज्ञान आम लोगो को पता था अब ऐसा तो है नही कि उस समय law of attraction नही था लेकिन हम अनजाने में ब्रह्माण्ड से ईश्वर से वो पा जाते थे। जो ओशो को या उन जैसे ज्ञानियों को सुन पाते थे तो वो उनकी सुनी बातो को कैसे लेते थे पता नही, क्या ऐसे ही जैसे आज हम ओशो को सुनकर महसूस करते है।

आज सोचता हूं उस काल खण्ड में जाता हूं तो पता चलता है अरे यही तो law of attraction, बचपन में हम सरल होते है बिना किन्तु परंतु के, यही law of attraction का सबसे बड़ा नियम है । कुछ छोटी छोटी चाहत के नियम की बात बताता हूं।

पहला love of attraction था, cricket खेलते थे उस समय दिमाग में आता था मैं अपने स्कूल में मोहल्ले में सबसे बेहतरीन खिलाड़ी बन जाऊं करीब 400/500 लोग तो थे ऐसे थे जो साथ खेलते थे और खेलते खेलते मैं उनमें से बेहतर होता गया । 

8/10 साल का रहा होऊंगा जब बरेली स्टेडियम जाना शुरू किया वहां बड़ी उम्र के खिलाड़ियों को देखकर लगता यह मुझसे बेहतर है अपने best friend अभय को देखकर हमेशा दिल दिमाग कहता यह मुझसे बेहतर खिलाड़ी है तो वो हमेशा रहा।

उस समय भी आज भी स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ में चुना जाना बहुत कठिन होता था पहले चार पांच शहर में ट्रायल होते थे जिसमे चार पांच हज़ार बच्चे आते थे उनमें से 25 / 30 का चुनाव होता था लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में ट्रायल के लिए और हमारे समय में 1977- 1980  बहुत खुर्राट यानि सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट गुरु थे अरुण भारद्वाज वो कोच नही होते तो टेस्ट खेलते पक्का खेलते। 

वो हमारा ट्रायल ले रहे थे ग्राउंड में अपने अपने शहर के 13/14/15 उम्र के 1000/1500 खिलाड़ी तो रहे होगें। मैं उस समय भी जानता था मैं सर्वश्रेष्ठ नही हूं लेकिन दिल दिमाग में एक बात बैठा ली selection तो कोई रोक नही सकता होकर रहेगा। अब ये बैठ गया तो बैठ गया ।

ट्रायल में गुरुजी ने मुश्किल से 3 गेंद बैटिंग कराई और 3 गेंद फिकवाई होगी तब भी पूरा भरोसा था मैं तो चुन लिया गया हूं।  और पहली list declare हुई तो उसमे पहले चार खिलाड़ियों में मेरा नाम था मजे की बात थी मैदान में उपस्थित पिताजी भी सिर्फ एक ही बात कह रहे थे हरीश तेरा चुना जाना पक्का है यानि आज के अनुसार एक ही चीज के लिए दो लोग अनजाने में law of attraction करने में लगे थे।

चुनाव के बाद अन्य खिलाड़ियों के साथ खेलने से किंतु परंतु आने लगा तो अनजाने में law of attraction के भरोसे पर प्रश्न चिन्ह लगने लगे । अभय भी एक साल सीनियर था वो बिना मेहनत किए best था परिस्थिति ऐसी बनी उसे कॉलेज छोड़ना पड़ा। हमारे batch में राजदीपक भारद्वाज बहुत मेहनती खिलाड़ी था दिल दिमाग ने स्वीकार कर लिया कि वो हम में से सर्वश्रेष्ठ है ।

यानि law of attraction का हम में किसी को नहीं पता था लेकिन हम राज के लिए अनजाने में law of attraction नियम का पालन कर रहे थे अपने लिए नहीं। बाद में राज ने स्कूल क्रिकेट की भारतीय टीम में जगह बनाई और वेस्टइंडीज खेलने गया जिस टीम में चेतन शर्मा सबा करीम जैसे खिलाड़ी थे जो बाद में भारत के लिए खेले। अभय और राज  दुर्घटना के कारण आज हमारे बीच नही है लेकिन उनकी अमिट छाप जीवन रहने तक रहेगी।

वीडियो बड़ा होगा लेकिन कोशिश रहेगी आप बोर न हो मुझे भारी भरकम वाक्य और वैज्ञानिक शब्दो की बहुत जानकारी नही है इसलिए जो शब्द वाक्य निकल रहे है वो दिमाग की जगह दिल से निकल रहे है। 
अब मैं law of attraction के ऐसे सच्चे किस्से पर आता हूं जो मेरी पत्नी को बहुत अच्छा न लगे लेकिन इस से बड़ा law of attraction, manifestation यानि मन की अभिव्यक्ति मन का भरोसा हो नही सकता। 

शादी की उम्र हो चली थी 27/28 वैसे अधिक नहीं होती लेकिन 1990 के दशक में अधिक होती थी । अम्मा पिताजी को चिन्ता अधिक थी मुझे कई लड़कियों ने reject कर दिया था वास्तव में जितनी भी लड़कियों ने देखा था मन दिमाग यही कहता था यह ही मना कर दे और वो मना कर देती थी क्योंकि किसी को भी देखकर मन की घंटी बजती ही नही थी । 

हां मन दिमाग को एक संदेश दे दिया था शादी करूंगा सिर्फ ऐसी लड़की से जो extraordinary खुबसूरत हो दिल दिमाग सीरत से, और मुझे पता था ऐसा होगा ही। यानि law of attraction अपना काम करने लगा था। 

करीब 1992/93 में पिताजी किसी माध्यम से बरेली की एक लड़की का फोटो लाएं मुश्किल से उंगली size ka फोटो था लेकिन उसे देख कर दिल दिमाग ने कहा यही लड़की तो है जिसकी तलाश है । मेरा फोटो मेरे विषम में उन लोगो को बताया गया ।

अब जैसा होता है हरेक परिवार और लड़की का और ऐसी लड़की का जो अधिक ही खुबसूरत हो का सपना होता है लड़का डॉक्टर हो अमीर हो जीवन में सफल हो दिखने में भी स्मार्ट हो । मेरे में तो इनमे से एक भी बात नही थी वही हुआ मुझे reject कर दिया गया ।

पहली बार थोड़ी देर के लिए दिल टूटा लेकिन घर वालो को ब्रह्माण्ड को ईश्वर को एक संदेश दे दिया शादी करूंगा तो इसी लड़की से और मन दिमाग में बैठा लिया शादी तो इसी से होगी।

आज के तरह मोबाइल तो होते नही थे होते भी तो हिम्मत नही होती मैं पूछ पाता कुछ कह पाता । मैंने तो सब कुछ तीसरी शक्ति पर छोड़ दिया। आज की पीढ़ी को लगेगा शादी के लिए लड़की के लिए कोई law of attraction का इस्तेमाल करता है क्या।

मुझे कहां पता था ऐसा कोई नियम होता है वो तो आज पता है इसलिए अंदाज लगाता हूं वो law of attraction, manifestation ही रहा होगा। इन्तजार करता रहा दिल दिमाग को कहता रहा पलट लड़की का दिल दिमाग ।

एक डेढ़ साल बाद पिताजी को बोला पता करे उस लड़की के बारे में । पता चला अभी उनकी शादी नही हुई है मन दिमाग ने कहा yes ये तो होना ही था। परिस्थिति किन्तु परंतु होने के बावजूद law of attraction ने अपना कमाल दिखाया। 14 मई 1995 को वो लड़की मीनाक्षी जीवन का भाग बन गई । 

हालांकि मुझे पाना मीनाक्षी का law of attraction न था न है उनका विश्वास भी इस सब में नही है she believes in practicality and I fully respect her decision but I know the power, law of attraction law of nature law of love.

आज के लिए इतना ही मेरी अपनी सभी कहानियां पूर्णतया law of attraction manifestation power of nature से भरी हुई है । तो तीन चार वीडियो में मेरी ही ऐसी कहानी होगी तब तक मुझे शायद इतना ज्ञान हो जाएं मैं भी दार्शनिक बन जाऊं मुझे भारीभरकम शब्दो वाक्यों का ज्ञान हो जाएं। वैसे law of attraction हम सब के इर्द गिर्द ही होता है हम कितना स्वीकार कर पाते है समझ पाते है यह भी तभी होता है जब ब्रह्माण्ड चाहता है हम उसे समझे।

Friday, April 19, 2024

बरेली कुमार टाकीज के समोसे और अनगिनत अस्पताल क्लीनिक

बरेली कुमार टाकीज के समोसे और अनगिनत अस्पताल क्लीनिक 

 जो बरेली में रहते है रहे है ऐसा हो ही नही सकता उन्होने कुमार टाकीज के समोसो का स्वाद न चखा हो। इस बार बरेली आएं तो  कुमार के समोसो के बिना रह नहीं पाएं। 

मुझे याद है बरेली में मेरी पहली फिल्म कश्मीर की कली थी रात का शो था पिताजी और उनके मित्र जगदीश लाला साथ थे। मेरी उम्र  उस समय करीब 10/12 साल की रही होगी। 

कश्मीर की कली 1964 में आई थी मेरा जन्म 1964 का है इसका मतलब जब मैंने देखी तो दोबारा तीबारा रिलीज़ हुई होगी।

पहले फिल्में सालो लगी रहती है या दोबारा भी रिलीज़ होती थी । हमने मध्यांतर तक ही फिल्म देखी पिताजी समोसे ले आएं पहली बार तभी कुमार के समोसे से पहचान हुई थी । उसके बाद कितनी ही फिल्में कुमार में देखी होंगी उस समय फिल्म के आकर्षण के अलावा समोसे भी बहाने होते थे कुमार जाने का। 

आज जब समोसा खाया तो कितनी ही यादें चलचित्र की माफिक दिमाग़ से गुजर गई। जो दूसरी फिल्म मुझे याद आती है वो है लैला मंजनू ऋषि कपूर और रंजीता वाली। समोसे तब भी खाएं थे। उस समय शायद 10 पैसे का था समोसा और फिल्म का टिकट आता था 3 रूपए का। 

आज यह समोसा मिलता है 8 रूपए में स्वाद वही पिसा हुआ आलू का काला पेस्ट काले नमक का इस्तेमाल थोड़ा खटास लिए हुए, मोटी पपड़ी अधिक सीका हुआ कुरमुरा सा, आया ना मुंह में पानी क्या करे ऐसा ही है कुमार का समोसा। 

अब बरेली का जिक्र हो रहा है तो समोसे से थोड़ा आगे बढ़ जाते है। मुझे बड़ी हैरत है जितने भी एकल सिनेमा हॉल है सभी बंद हो गए है या बंद होने की कगार पर है मेरी समझ से परे है क्यों पीवीआर या किसी अन्य मल्टीप्लेक्स ने कोई पहल नही की। की तो होगी लेकिन बात क्यों नहीं बनी पता करता हूं ।

कभी बरेली की शान समझे जाने वाले थियेटर प्रभा और प्रसाद बाहर से ऐसी स्थिति में नहीं लगते कि अंदर जाने की हिम्मत हो पाएं । नवेल्टी, इंपीरियल, तारा, कमल जैसे सिनेमहाल बंद हो चुके है। एक समय था जब एक किलोमीटर के क्षेत्र में 6-7 सिनेमा हॉल थे । 

मुझे याद है पहले अमर उजाला में इश्तेहार छपता था तो पता चलता था कौन सी फिल्म लगी है अब वो सब बंद हो चुका है शायद ही कोई इश्तेहार सिनेमा हॉल के आते हो। 

मुझे इस बार बड़ा आश्चर्य हुआ पूरी बरेली सिर्फ छोटे बड़े अस्पतालों क्लीनिक से भरी पड़ी है संख्या इतनी अधिक है कि मुझे लगता है इतने मरीज नही होंगे जितने क्लीनिकों की संख्या है।  

कोई नया व्यक्ति पहली बार बरेली आएं तो डर ही जाएं  किस बीमार शहर में आ गया। कहते भी है न आप क्या चाहते है बरेली का आम शहरी जब घर से बाहर निकलता होगा तो इन बीमार आलय को देखकर खुद को बीमार महसूस करता होगा। मजे की बात ये कि सबसे ज्यादा अस्पताल और क्लीनिक बरेली स्टेडियम वाली सड़क के इर्द गिर्द ही है। 


क्या कर रहे हो बरेली वालो निकलो घरों से स्टेडियम में जाकर भागादौड़ी करो स्वस्थ रहो समोसे खायो कभी कभार जब स्वस्थ होगे तो स्वाभाविक है अस्पताल भी सप्लाई और डिमांड पर ही चलेंगे।

फिर मिलते है नई कहानी नए अनुभव के साथ।

हरीश शर्मा 

मुंबई दिल्ली से

Thursday, April 18, 2024

पर्पल फायर महिला कार रैली के विजेता: दिल्ली • देहरादून • जिम कॉर्बेट


पर्पल फायर महिला कार रैली के विजेता: दिल्ली • देहरादून • जिम कॉर्बेट

पर्पल फायर महिला कार रैली ने रविवार को जिम कॉर्बेट में अपना तीसरा चरण पूरा कर लिया और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद विजेता बनीं सभी महिलाएं-  डॉ. वाणीश्री पाठक, ललिता गौड़ा, प्रथम रनर-अप जसमीत कारू ज्योति अयंगर, द्वितीय रनर-अप दीपा चंदर, सविता रेड्डी ,कविता गोलेचा, नैना अब्रोल, इन्हें विजेता ट्रॉफियां देकर सम्मानित किया गया।
इससे पहले स्तन कैंसर जागरूकता और महिला सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली प्रतीक, पर्पल फायर महिला कार रैली ने देहरादून से जिम कॉर्बेट तक अपना दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा किया था।
उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल, महामहिम लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। देहरादून से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क तक की रोमांचक यात्रा, जिसका उद्देश्य स्तन कैंसर की रोकथाम और शीघ्र पता लगाने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी फैलाना है।
47 कारों में लगभग 100 महिला ड्राइवर इस मुद्दे का समर्थन कर रही हैं और साथ ही मौजूदा लोकसभा चुनावों में नागरिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित कर रही हैं।
29 मार्च की शाम को, राजभवन सभागार ने स्तन कैंसर जागरूकता के लिए समर्पित एक विशेष कार्यक्रम "वी कैन डिफीट ब्रेस्ट कैंसर" की मेजबानी की।
माननीय राज्यपाल, महामहिम लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने महिला ड्राइवरों के साहस की सराहना की और जागरूकता और सशक्तिकरण में रैली के दोहरे महत्व पर जोर दिया।
डॉ. (श्रीमती) रमेश सरीन और डॉ. (कर्नल) सी.एस. पंत, वीएसएम, फोरम फॉर ब्रेस्ट कैंसर प्रोटेक्शन के अध्यक्ष, और पर्पल फायर महिला कार रैली के निदेशक ब्रिगेडियर हरिंदर पाल सिंह बेदी ने इस संगठन का नेतृत्व किया है।
ब्रिगेडियर बेदी ने रैली की व्यापक सहायता प्रणाली पर प्रकाश डाला, जिसमें दो एम्बुलेंस, डॉक्टरों की एक टीम और पूरी यात्रा में सहायता प्रदान करने के लिए तैयार 45 सहायक कर्मचारी शामिल हैं।
सबसे पहले आईपीएस सुश्री गीता रानी वर्मा ने दिल्ली के डीएलएफ एवेन्यू मॉल से रैली की शुरुआत को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

अन्य विभिन्न श्रेणियों में विजेता हैं- प्रज्ञा विज चावला, असावरी जालान, विकास जालान, रूपाली जालान, प्रथम स्थान- समृद्धि खन्ना, शांतनु खन्ना, सिमी खन्ना, संजय खन्ना, दूसरे स्थान पर अदिति गर्ग, अभिनव गर्ग
महिला-एमेच्योर वर्ग में विजेता प्रियंका जेटली, आंचल मेहता हैं, प्रथम उपविजेता परवीन अहलावत, चशजीव साहनी, त्रिवेणी सहगल, शिवानी कपूर हैं, द्वितीय उपविजेता भावना शर्मा, श्वेता जसवाल हैं और मिश्रित-एमेच्योर वर्ग में विजेता वंदना भल्ला  मनोज भल्ला, प्रथम रनर-अप, मीरा गोयल, एनके गोयल, द्वितीय रनर-अप वंदना राव, ललित यादव।

सबको शानदार ट्राफी देकर सम्मानित किया गया।

Wednesday, April 3, 2024

purple fire Women car rally 2024


purple fire women car rally completed its 3rd leg on Sunday at Jim Corbett and after tough competition winners are All Women- Expert Dr Vanishree Pathak ,Lalita Gowda, 1st Runner-up Jasmeet Karu Jyothi Iyengar, 2md Runner-up Deepa Chander, Savita Reddy,Kavita Golecha,Naina Abrol, they are felicitated with winning trophies.

Earlier A powerful symbol of breast cancer awareness and women's empowerment, the Purple Fire Women's Car Rally successfully completed its 2nd leg from Dehradun to Jim Corbett. His Excellency Lt. Gen Gurmit Singh (Retd), Honorable Governor of Uttarakhand, flagged off the rally,
Now, the rally continues its exciting journey from Dehradun to Jim Corbett National Park, aiming to spread vital information about breast cancer prevention and early detection. Approximately 100 women drivers across 47 cars champion this cause while also encouraging women's civic participation in the ongoing Lok Sabha elections.
On the evening of March 29th, Raj Bhawan Auditorium hosted "We Can Defeat Breast Cancer," a special event dedicated to breast cancer awareness. The Honorable Governor, His Excellency Lt. Gen Gurmit Singh (Retd), commended the courage of the women drivers and emphasized the rally's dual importance in driving awareness and empowerment.
Dr. (Mrs.) Ramesh Sarin and Dr. (Col.) C.S. Pant, VSM, Chairpersons of the Forum for Breast Cancer Protection, and Brigadier Harinder Pal Singh Bedi, Director of the Purple Fire Women's Car Rally, have spearheaded the organization of this impactful initiative. 
Brigadier Bedi highlighted the rally's comprehensive support system, including two ambulances, a team of doctors, and 45 support staff ready to provide assistance throughout the journey. IPS Ms. Geeta Rani Verma had previously flagged off the rally's start from DLF Avenue Mall in Delhi.
Other winners in different categories are Mixed- Expert are Pragyaa Vij Chawla, Asavari Jalan, Vikas Jalan, Roopali Jalan, First Runners- Samriddhee Khanna, Shantanu Khanna,Simi Khanna, Sanjay Khanna, 2nd runners up, Aditi Garg, Abhinav Garg
In Women- Amateur category Winners are Priyanka Jaitely, Anchal Mehta, 1st Runner-up are Parveen Ahlawat, Chashjeev Sahni, Triveni Sehgal, Shivani Kapur, 2md Runner-up are Bhavna Sharma, Shweta Jaswal and in Mixed- Amateur category Winners are Vandana Bhalla, Manoj Bhalla, 1st Runner-up, Meera Goyle, NK Goyle, 2nd Runner-up Vandana Rao, Lalit Yadav.

अमेरिका में हिन्दी गानों का परचम फहराते भारत के गायक अयाज़ इस्माइल


अमेरिका में हिन्दी गानों का परचम फहराते भारत के गायक अयाज़ इस्माइल

मुंबई में जन्मे और अमेरिका में रह रहे गायक संगीतकार अयाज इस्माइल के नवीनतम एकल गाने तुझसे कहूं ने तेजी से दुनियां भर के दर्शकों के दिलों पर कब्जा कर लिया है

यूट्यूब पर तुझसे कहूं गाने को करीब 20 लाख से अधिक बार देखा गया है। यह मील का पत्थर न केवल गीत की व्यापक अपील को उजागर करता है बल्कि संगीत उद्योग में एक उभरते सितारे के रूप में अयाज़ की स्थिति को भी मजबूत करता है।


प्रेम के शाश्वत सार के साथ आधुनिक ध्वनियों का मिश्रण, तुझसे कहूं दुनिया भर के श्रोताओं के साथ गूंजता है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे संगीत बनाने के लिए अयाज़ की प्रतिभा को प्रदर्शित करता है।

गाने की सफलता अयाज़ की अनूठी संगीत दृष्टि का प्रमाण है, जिसमें उन्होंने मुंबई में अपनी जड़ों को संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने अनुभवों के साथ जोड़कर एक ऐसी ध्वनि तैयार की है जो ताज़ा और गहराई से प्रासंगिक दोनों है।

दृश्यात्मक रूप से आश्चर्यजनक संगीत वीडियो, जो तुझसे कहूँ की गीतात्मक कथा का पूरक है, ने ट्रैक की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो दर्शकों को एक मनोरम दृश्य कहानी पेश करता है जो गीत के भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।



अयाज़ का अपने प्रशंसकों के प्रति आभार और गाने के पीछे सहयोगात्मक प्रयास स्पष्ट है। कुछ ही हफ्तों में इस मुकाम तक पहुंचना एक सपने के सच होने जैसा है। यह हमारी टीम की कड़ी मेहनत और हमारे श्रोताओं के अविश्वसनीय समर्थन को दर्शाता है।

अयाज़ ने कहा, 'तुझसे कहूं' मेरे दिल का टुकड़ा है और मैं इसे इतने सारे लोगों के साथ जुड़ते हुए देखकर रोमांचित हूं। जैसे-जैसे तुझसे कहुं गति पकड़ रहा है, अयाज़ इस्माइल पहले से ही अपने अगले संगीत प्रयासों की योजना बना रहा है।

गाने की सफ़लता ने अगले गाने और संगीत को अधिक प्रभावशाली और लय बद्धता को खुद चुनौती दी है, अयाज़ अगले गाने कोअधिक कर्णप्रिय और सीमा पार भी पसंद आने वाले ट्रैक देने का वादा करते है।
तुझसे कहूँ की सफलता सिर्फ अयाज़ के लिए एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि हर जगह के संगीत प्रेमियों के लिए जश्न का क्षण है, जो यह साबित करता है कि संगीत हम सभी को जोड़ने की ताकत रखता है, चाहे हम दुनिया में कहीं भी हों।

तुझसे कहुं यूट्यूब पर देखने के लिए उपलब्ध है, जो अधिक दर्शकों को अयाज़ इस्माइल की सफलता का जश्न मनाने संगीत और भावनाओं के आकर्षक मिश्रण का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता है जिसने करीब 20 लाख से अधिक दर्शकों का ध्यान खींचा है